Tuesday, 22 March 2016

प्रोफेसनलिज़्म कहा से लाऊ भाई !

कल मुझसे किसी ने कहा की journalism अपने professionalism को खोता जा रहा है। उस समय मुझे बड़ा अजीब सा लगा, मैंने मन ही मन सोचा कि अब ये बताएँगे professionalism क्या होता है। लेकिन कुछ देर विचार करने के बाद लगा कि हा सही तो कह रहे है, वाकई मे journalism पेशे वाले अपने professionalism को भुलते जा रहे है। भला कभी कहीं ऐसा होता है की वही आदमी रिपोर्टर, स्पाँट ब्वाय, लाइट मैन , टेक्निशीयन, कैमरा मैन वगैरह वगैरह का काम एक साथ करेगा तो क्या होगा। सभी मीडिया संस्थायें मल्टी टैलेन्टेट व्यक्ति के खोज मे रहती है, इस लिए नही कि काम अच्छा हो, इसलिए की काम सस्ते मे हो सके। ऐसे मे professionalism कहा से आएगी भाई। चलो अच्छी बात है सभी काम आने चाहिए लेकिन इसका मतलब ये नही कि एक ही समय मे सभी कामों की जिम्मेदारी एक साथ लेली जाय। लेकिन क्या करें मज़बूर हैं करना ही पड़ता है साहब। जो ना कहेगा वो अपने आप ही समझ जायेगा। यहाँ दस वर्ष का अनुभव नहीं दस लोगों से संपर्क होना आवश्यक है। ऐसे में अगर आप मुझसे पूछेंगे कि तुम प्रोफेसनल नहीं हो, तब तो मै बस यही कह पाउँगा प्रोफेसनलिज़्म कहा से लाऊ भाई यहा क्वालिटी नहीं क्वांटिटी चाहिए
आज के दौर की बात करें तो बेरोजगारो की कमी नहीं है इस क्षेत्र मे। ऐसा लगता है जैसे बेरोजगार पैदा करने की फैक्टरी लगी है। लगभग सभी बड़े शहरों मे दो से तीन कमरों मे मीडिया के शिक्षण संस्था चल रहे है। जो प्रत्येक वर्ष युवाओं को टीवी पर दिखने, संवाददाता, फिल्मकार बनाने का सपना दिखाकर मोटी रकम अदा करवा लेते है और भारी संख्या मे युवाओं को बेरोजगार कर देते है। कुछ समय बाद बेरोजगारी ऐसा नासूर बन जाता है जो कुछ भी करने पर मज़बूर कर देता है। आखिर में यहां अंग्रेजी की एक कहावत पर अमल करना ही पड़ता हैं "समथिंग इज़ बेटर देन नथिंग"
एक नामी न्यूज चैनल मे कार्यरत पत्रकार का कहना है कि इसमें कोइ दो राय नहीं है। वाकई मे पत्रकारिता के पेशे मे प्रोफेशनलिजम अब दूर दूर तक नजर नहीं आता है।
कुछ दिन पहले जहाँ एक ओर अंतरराष्ट्रीय मीडिया यह कहती नजर आ रही थी कि भारतीय मीडिया संवेदन हीन होती जा रही है "किसी के मौत या शोक को मसाला लगा कर परोसती है"वही दूसरी ओर समाचार माध्यमो को चला रहे व्यापारियों को इससे कोई फर्क नही पड़ता कि journalism कैसा और कैसे चल रहा है, बस कमाई होनी चाहिए।
मीडिया क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि journalism विधा संचार की वह प्रणाली है जिसमें समय समय पर परिवर्तन होता आया है और आगे और भी बदलाव देखे जा सकते है।

No comments:

Post a Comment